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छात्रावास के बारे में यह जानकर आपको आश्चयॅ व ख़ुशी होगी कि आज के इस चकचोँद भरी दुनिया में बोहरा जी जैसे ब्यक्ति की सोच व समय जैसे कुछ लोग ही होते है, जो परहित व सहयोग के लिए जीते है | मेरा परिचय श्री बोहरा जी से मेरे CA Professional Practise के दौरान हुई | मेरा सौभाग्य है की मुझे उनसे बहुत कुछ समझने व सीखने का मौका मिला , न केवल प्रक्टिसे बल्कि अपनी जिंदगी का सफर कैसा हो , के बारे में भी | उनकी सोच थी कि बहार से आकर जो लड़के लडकिया यहाँ पढ़ना चाहते है उन्हें सही बातावरण मिले और सभी व्यस्था पुरे इंतजाम के के साथ हो , एक ऐसा होस्टल बनवाना | क्योकि मै दिनहाटा से आकर यहाँ पोद्दार छात्र निवास में अपनी बी.कॉम and CA की पढाई पूरी की , सो इस बात के महत्व को समझते हुए अपनी रूचि इस नेक कार्य में ली कि किस तरह बोहरा जी की सोच को सच्चे रूप में परिवर्तित किया जाये | काफी खोजबीन एव अध्ययन के बाद मेहनत रंग लाई जिसका परिणाम है उपरोक्त "बहुलाल नन्दलाल बोहरा छात्रनिवास " बागुड़ एवन्यू में पुराने माकन को लेकर उसमे पूरा नयापन लाकर यह छात्रावश बना | अब बात संचालन की थी जिसके लिए हमारे साथिओ Ex - Boarders को मिलकर एक संचालन समिति और मेरे को प्रथम सचिव के रूप में सेवा करने का सौभाग्य मिला | हमारे बोहरा जी का बिचार लेकर इसका एक संबिधान की रूप रेखा को अंतिम रूप दिया

इसके अंतर्गत यह सोच रही की जो पहले से रह रहे है उन्हें छात्रावास में मौका न देकर जो नए छात्र बहार से आ रहे है उन्हें मौका दिया जाये पर क्योकि छात्रावास की सुरुआती दौर थी तो नए आने वाले छात्र को पढाई व अन्य सुबिधाओ जैसे यहाँ के रस्ते के बारे में , खाने पीने की ब्यवस्था के बारे में व अन्य हेतु हमने निर्णय लिया की सुरुवात में कुछ छात्र करीब (२०-२४ ) ऐसे लिए जाये जो यहाँ पहले से आकर P.G या कही रह रहे है | व उन्हें छात्रावास की जरुरत हो | व बल्कि नए जिसमे उन्हें उपरोक्त छात्र का सहयोग मिले | संबिधान में हर चीज की ब्यवस्था थी की कैसे अनुशासन रहेगा , कैसे ब्यवस्था चलेगी व क्या नियम होंगे व दाखिल में उसमे गारंटी कैसे रहेगी | इसका उदाहरण भी एक सामने आया जब बोहरा जी के अनुमोदन से किसी छात्र का दाखिल हुआ व नियम पालन की कमी पाई गई पर हम सब चुप रहे, कि दाखिला बोहरा जी के द्वारा आया सो बात को बढ़ाया नहीं | पर इसबात की खबर जब उनको लगी तोह उन्हों ने हमें कहा की अपना कानून सभी के लिए एक है व आप अपना उचित निर्णय ले | यानि मैंने अनुमोदन किया उसका कोई लाभ उठाये तोह आप कोई भी Disciplinary ले नहीं तो गलत काम होगा | छात्रावास के उचित देखभाल हेतु बोहरा जी भी बराबर खुद जाकर, वहाँ ब्यवस्था में क्या किस चीज की जरुरत और छात्र पर किसी भी कार्य का अधिक दबाव न परे इस ओर धयान रख़ते थे |

इसी कड़ी में एक बार इनके मन में आया कि छात्राओ हेतु छात्रावास की ब्यवस्था इस महानगरी के मध्य बिंदु पर की जाये जिससे वे अपने जीवनशैली व अध्ययन की पराकाष्ठा तो पा सके व आगे की पीढ़ी को भी वो अनुभव का लाभ दे सके जिससे साधारण जीवनयापन वाले लोग का भी स्तरसमज में ऊपर उठ सके क्योकि अगर एक लड़की अच्छी शिक्षित हो तो वो अपने परिवार के बच्चो की शिक्छा का भी ाचा ख्याल आगे रख पायेगी | और इस सोच को भी उनके नेक बिचार के मूर्तरूप दिया | सन २००६ में जिससे कोलकाता के काकुरगाछी जो एक अछि जगह है व आसानी से चारो और से पंहुचा जा सके | चुकि बिचार, सोच, सलाह व आर्थिक सहयोग देना तो अनेक हाथ में भी पर इसे मृतरूप देने की मंजिल में कई बढ़ाए भी थी, की पुराने माकन को लेकर काम करवाना जिसमे उस जगह की सभी गतिबिधियो को नियंत्रित कर, उससे पर पाना | व बिशेषकर छात्राओ हेतु छत्रावास का सफर संचालन ये सब जोखिम भरे काम थे, पर प्रभु कृपा से ऐसे नेक इंसान की सोच व साहस ने बड़ा परकीया व छोटी मोटी बाधाओं के बजूद बाबजूद भी ये छात्रावास अपनी कुशल संचालन समिति के द्वारा अच्छी तरह से संचालित हो रहे है | और इन छात्रावासों में अपने जीवन की सफलता हेतु अध्ययन कर आगे अपने भभिस्या को सवार पाने में बहुत सरे छात्रा सफल हुए है |

आगे अपने ग्रिहस्थ जीवन का सफल संचालन कर रहे है | उनका मानना है कि बोहरा जी जैसे नेक इंसान ने अपने सेवा व सहयोग से न केवल हमारी जीवनचर्य सुधर दी बल्कि अपनी आमिर छाप से हमारे ह्रदय को झकझोर दिया कि दुनिया में ऐसे इंसान भी होते है जो कि दुसरो कि जिंदगी को खुशहाल बनाने हेतु तन, मन, धन, से अपने को न्योछवर करते है | आपको सेवा व सहयोग की मिशाल हो सकता है और भी मिल जाएगी पर व अपने जीवन में इतनी सादगी रखते थे (यानि अपने लिए कम से कम खर्च ) व जनहित कार्य हेतु अपने मन की सोच से तो कर्ममय रहते ही थे | समाज के दूसरे लोग भी सेवा हेतु उनसे आग्रह करते थे तो कदम आगे बढ़कर उसमे आर्थिक सहयोग करते थे | ऐसी बिशाल सोच व धानीप्रतिभा से संपन्न ब्यक्ति काम ही मिलेंगे जो कि अपर धन होते हुए भी अपने पर खूब सिमिति खर्च करना व जरुरत मन्द लोगो का सहयोग करना | आज वो इस दुनिया में नहीं है पर उनके जितने भी उपरोक्त व अन्य कार्य सम्पादित हुए है व हो रहे उनके कायम रहने का एहसास करा रहे है व करते रहेंगे | पारिवारिक प्रेम आपस में उनका ऐसा था कि वे तन से भले न हो उनके मन के सरे कार्य उनके भाइयो व बच्चो द्वारा सम्पादित हो रहे है व होते रहेंगे | आशा है कि समाज में इस कड़ी में और भी कई नेक इंसान सेवा व सहयोग हेतु आगे आकर जनहित नाये कार्य को सम्मादित कर समाज को नया आयाम देंगे |

ऐसे ब्यक्तित्व को शत-शत नमन |

---- आशोक माहेश्वरी

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